Shayri-e-Mohbbat


��जब भी चाहा सिर्फ तुम्हे चाहा,
पर कभी तुम से कुछ नही चाहा ��



 ��चाहने वाले तो बडे नसिब से मिलते है
तुम ये बात मानोगे मेरे बिछड जाने के बाद ��


�� मोहब्बत भी कितनी अजीब है ना
सारे खिलौने छोड़ सिर्फ जज़्बातों से खेलती है ��


�� याद किसी को करना यह बात नही जताने की,
दिल पर चोट देना आदत है जमाने की,
हम आप को याद बिल्कुल नही करते,
क्यूँ की याद करना एक
निशानी है भूल जाने की ��



�� आदत सी पड़ गयी है मुझे इस बेरुखी की यूँ तो
पर तेरे ठुकराने के इंतज़ार का मजा कुछ और ही है ��


�� मुझे भी इल्म है, तुझे भी इल्म है जालिम
पर तेरी इबारत में लिखी
इस जुदाई के इंतज़ार का, मज़ा कुछ और ही है ��


�� रुठुंगीअगर तुजसे तो इस कदर रुठुंगी की
ये तेरी आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगा  ��

�� नज़र चाहती है दीदार करना, दिल चाहता है प्यार करना,
क्या बताएं इस दिलका आलम, नसीब मैं लिखा है इंतज़ार करना ��


 �� हमने भी कभी प्यार किया था, थोड़ा नही बेशुमार किया था,
दिल टूट कर रह गया, जब उसने कहा, अरे मैने तो मज़ाक किया था ��


�� तेरे लिये कभी इस दिल ने बुरा नही चाहा,
ये और बात है कि, मुझे ये साबित, करना नही आया ��


 �� दोनों ही बातों से तेरी, एतराज है मुझको,
क्यूँ तू जिंदगी में आया, और क्यूँ चला गया ��


�� ना जाने वो कौन सी डोर है, जो तुझ संग जुङी है,
दूर जायें तो टूटने का ङर है, पास आयें तो उलझने का डर है ��


�� ना चाहते हुए भी आ जाता है लबो पे तेरा नाम
कभी तेरी तारीफ़ में तो कभी तेरी शिकायत में ��


�� समझा दो अपनी यादों को तुम ज़रा
दिन-रात तंग करती हैं कर्ज़दार की तरह ��

��  माना की बुरी हु लेकिन
इतनी भी नहीं की याद भी न आउ ��


�� डाकिया तू ही बता  तूने तो देखे होंगे...
कैसे होते हैं वो ख़त  जिनके जवाब आते हैं ��


�� हाथों की लकीरों मैं तुम हो ना हो
जिदंगी भर दिल में जरूर रहोगे ��


�� इश्क़ का दस्तूर ही कुछ ऐसा है
जो इसे जान लेता है, ये उसी की जान लेता है ��

 ��उसके सिवा किसी और को चाहना मेरे बस में नहीं है
ये दिल उसका है   अपना होता तो बात और होती ��


�� लोग कहते हैं कि मोहब्बत एक बार होती है
लेकिन मैं जब जब उसे देखती हु मुझे बार बार होती है ��


 �� अजीब मेरा अकेलापन है.
तेरी चाहत भी नहीं और तेरी जरूरत भी है �� 


�� जानते हो महोब्बत किसे कहते हैं ?
किसी को सोचना, फिर मुस्कुराना और
फिर आसू बहाते हुए सो जाना ��


�� क़ाश कोई ऐसा हो, जो गले लगा कर कहे
तेरे दर्द से मुझे भी तकलीफ होती है  ��


��बड़ा अजीब होता है ये मोहब्बत है खेल भी
एक थक जाये तो दोनों हार जाते है ��


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